ब्रेन फिंगर प्रिटिंग

ब्रेन फिंगर प्रिटिंग – Brain Finger Printing in Hindi

Brain fingerprinting Quiz in Hindi

ब्रेन फिंगर प्रिटिंग क्या है (What is Brain Finger Print)

ब्रेन फिंगर प्रिटिंग अपराधियों के मस्तिष्क में अकिंत जानकारी की पुष्टि करने की आधुनिक वैज्ञानिक विधि है। ब्रेन फिंगर प्रिटिंग में पी-300 रिकॉर्ड कर यह पता किया जाता है कि अपराध सम्बन्धी या अन्य वाछित जानकारी उसके मस्तिष्क में पहले से अकिंत है या नहीं।

क्या ब्रेन फिंगर प्रिटिंग नारको टेस्ट जैसी विश्वसनीय है (Brain Finger Print and Narco Test)

ब्रेन फिंगर प्रिटिंग को नारको टेस्ट से भी अधिक विश्वसनीय माना जा रहा है। कोई व्यक्ति स्वनियंत्रण द्वारा नारको टेस्ट में धोका दे सकता है।

पी-300 रिकार्ड क्या है (What is P-300 Record)

हमारी समस्त गतिविाधियों का केन्द्र मस्तिष्क होता है। मस्तिष्क तथा शरीर में अन्य अंगों के मध्य संवाद विद्युत तंरगों के रूप में होता है। आजकल मस्तिष्क में उत्पन्न इन तंरगों को रिकार्ड करना सभ्मव होगया है। इस रिकॉर्ड को ईईजी या इलेक्ट्रो इन्फ्लोग्राम कहते है। सोते, जागते या अन्य कार्य करते समय का ईईजी अलग अलग प्रकार का होता है। विभिन्न कार्यों का नियन्त्रण मस्तिष्क के अलग भागों से होता है अतः विद्युत तरंगें भी अलग भागों से उत्पन्न होती है। जब व्यक्ति किसी परिचित वस्तु या व्यक्ति को देखता है या आवाज सुनता है तो 300 से 600 मिली सैकण्ड बाद उसके मस्तिष्क के पेराटल पिण्डों से उत्पन्न सकारात्मक विद्युत तंरगे ईईजी में रिकार्ड होती है। इसे पी-300 रिकार्ड कहते है। आजकल पी-300 रिकार्ड के साथ कुछ अन्य संकेतो का प्रयोग भी जाता है इस रिकार्ड को मरमर ( मेमोरी एण्ड एनकोडिंग रिलेटेड मल्टी फेस्टेड ईलेक्ट्रोएनसिफलोग्राफिक रेस्पोन्स) कहते है।

पी-300 रिकार्ड की खोज किसने की (Who invented P300 Record)

पी-300 रिकार्ड की खोज 1965 संमुअल सुआटोन ने की । इनका ब्रेन फिंगर प्रिटिंग के रूप प्रथम उपयोग लॉरेन्स फारवेल ने किया। इस कारण इन्हें फारवेल ब्रेन फिंगर प्रिटिंग भी कहते हैं।

ब्रेन फिंगर प्रिटिंग की विश्वसनीयता का क्या आधार है (Reliability of Brain Finger Printing)

यह एक यान्त्रिक विधि होने के कारण पूर्णत वस्तुनिष्ठ है। इस विधि में संदिग्ध व्यक्ति से न तो कोई प्रश्न पूछा जाता है और नहीं उसे कुछ बोलना होता है। इस कारण यह व्यक्ति निरपेक्ष है। किसी परिचित वस्तु, व्यक्ति को देखने या परिचित आवाज सुनने पर ही धनात्मक तरंगे उत्पन्न होगी अन्यथा नहीं। जिस व्यक्ति का परीक्षण किया जाता है वह किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं कर सकता। अपराध के कई प्रकरणों में अन्य कोई साक्ष उपलब्ध नहीं होता मगर मस्तिष्क में तो सूचनाएं अकिंत होती ही है, अतः यह विधि प्रभावी होती है।

ब्रेन फिंगर प्रिटिंग की कैसे की जाती है (How Brain Finger Printing is Done)

ब्रेन फिंगर प्रिटिंग पूर्णतः कम्प्यूटर आधारित विधि है। जिस व्यक्ति का परिक्षण किया जाना है उसे विद्युताग्र व संवेदक लगा विशिष्ट प्रकार का टोप पहनाया जाता है जो मस्तिष्क उत्पन्न तंरगों का रिकार्ड कम्प्यूटर को भेजता हैं। अब व्यक्ति को कम्प्यूटर पर तीन प्रकार की सामग्री दिखाई या सुनाई जाती है- 1. जिनका घटना से सम्बन्ध हो 2. जिनका घटना से कोई सम्बन्ध नहीं हो 3. वे जिनकी जानकरी व्यक्ति को पूर्व में होने की पुष्टि करनी हो।

ब्रेन फिंगर प्रिटिंग की कमियां क्या है (Cons of Finger Printing)

ब्रेन फिंगर प्रिटिंग सत्य जानने की विधि नहीं है। हत्यारे तथा हत्या के चश्मदीद गवाह दोनों के पी-300 रिकॉर्ड एक समान होंगे। बलात्कार के प्रकरण में यह पता नहीं चल सकता कि सम्बन्ध सहमती से बने या जबर्दस्ती से। मस्तिष्क में उपस्थित जानकारी प्रत्यक्ष अनुभव से है या किसी तस्वीर आदि के कारण इसका अन्तर भी स्पष्ट नहीं हो सकता।
8.ब्रेन फिंगर प्रिटिंग क्या कोई अन्य उपयोग भी हैं

मस्तिष्क संबन्धी रोग जैसे एल्झीमर आदि की प्रारम्भिक अवस्था में दवा के प्रभावकारी होने की जांच में इसका उपयोग हो सकता है। किसी विज्ञापन का मस्तिष्क पर कितना प्रभाव हो रहा है इसकी जाँच भी पी-300 रिकार्ड से की जाती है। मस्तिष्क द्वारा कम्प्यूटर को नियन्त्रित करने की संभावनाओं को पता करने में पी-300 तरंगों का उपयोग किया जा रहा है।

विष्णु प्रसाद चतुर्वेदी
सेवानिवृत प्रधानाचार्य एवं विज्ञानं व्याख्याता
विज्ञान शिक्षा व बाल साहित्य का लेखन

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