पीपीएफ खाता एवं पीपीएफ नियम

पीपीएफ – सार्वजानिक भविष्य निधि (PPF Hindi)

पीपीएफ खाता केंद्र सरकार द्वारा संचालित एक लंबी अवधि के लिए बचत की योजना है जिसमे पैसा कम से कम 15 साल के लिए जमा होता है| इस योजना में सरकार द्वारा इनकम टैक्स में छूट दी जाती है|

पीपीएफ खाते के फायदे (PPF Advantages)

  • पीपीएफ खाते में हर साल 1.5 लाख तक की जमा की गई राशि पर आयकर में छूट मिल जाती है, यानि 1.5 लाख की राशि, व्यक्ति की कुल आय से कम कर फिर टैक्स की गणना की जाती है| यह छूट 80डी के तहत होती है जिसमे पीपीएफ के अलावा बचत के अन्य स्कीम भी शामिल होती है|
  • पीपीएफ खाते में जमा राशि पर मिलने वाली ब्याज की रकम पर भी आय कर नहीं लगता है| जबकि बचत स्कीम जैसे बैंक एफडी, बांड, एनएससी एवं म्यूच्यूअल फण्ड में मिलने वाली ब्याज की रकम पर आय कर लगता है|
  • किसी ब्यक्ति के पीपीएफ खाते में जमा राशि, उस ब्यक्ति पर बैंक की डिक्री आने पर भी जब्त नहीं की जा सकती है|

पीपीएफ खाते में जमा कराने के नियम (PPF Deposit Rules)

    • प्रत्येक वित्तीय साल में नतम राशि रु 500 जमा कराना जरूरी है ।
    • वित्तीय साल में अधिकतम जमा की राशि की सीमा 1,50,000 रु है।
    • एक महीने में दो बार एवं एक वर्ष में अधिकतम 12 बार राशि जमा करा सकते है ।

पीपीएफ पर ब्याज की दर और गणना (PPF Interest Calculation)

ब्याज जमा पर मिलने वाले ब्याज की दर सरकार द्वारा हर तीन महीने पर घोषित की जाती हैं| यह ब्याज की दर खाते में बैलेंस रही पूरी रकम पर लागु होती है| ब्याज की गणना महीने वार की जाती है और यह महीने के 5 वें और आखिरी दिन के बीच खाते में न्यूनतम शेष राशि पर की जाती है। इसलिए यदि आप किसी महीने की 6 तारीख को या उससे बाद पैसा खाते में जमा करते हैं, तो उस राशि पर ब्याज अगले महीने से ही मिलता है| ब्याज की राशि साल के अंत में खाते में जमा होती है (yearly compounding)।

ब्याज दर लागु करने का यह तरीका बैंक की एफडी एवं आरडी से अलग है| एफडी एवं आरडी में ब्याज की दर खाता खोलते समय लागु दर होती है और एफडी एवं आरडी की पूरी अवधि तक उसी दर से ब्याज मिलता है| पीपीएफ खाते में ब्याज दर हर 3 महीने बाद घोषित की जाती है जो की उस समय प्रचलित दर के अनुसार घट या बढ़ सकती है और आपकी पुरानी जमा राशि पर भी नयी दर से ही ब्याज मिलता है|

घटती ब्याज दरों के समय पर पीपीएफ में जमा रकम पर मिलने वाला ब्याज कम हो जाता है जबकि लंबी अवधि की एफडी एवं आरडी पर पुरानी दरें ही चालु रहती है| एफडी एवं आरडी में हर तीन महीने बाद ब्याज को मूल में जोड़ कर फिर उस पर ब्याज मिलता है (quarterly compounding) जबकि पीपीएफ में यह सालाना (yearly compounding होता है|

खाता खोलने की पात्रता एवं अवधि (PPF Eligibility and Duration)

एक व्यक्ति एक ही खाता खुलवा सकता है| अनिवासी भारतीय (एनआरआई) पीपीएफ खाते नहीं खोल सकते हैं और खाता खोलने के बाद मौजूदा खाताधारक एनआरआई बन जाते हैं तो खाते पर सामान्य बचत खाते के अनुसार ब्याज मिलता हैं या खाता बंद करवाया जा सकता है|

खाता 15 सालो के लिए खोला जाता है| 15 साल पूरे होने पर खाते से पूरा पैसा निकाल सकते है या फिर अवधि को 5 -5 वर्ष के लिए कई बार बढाया जा सकता है|

निकासी एवं लोन (PPF Withdraw and Loan)

पीपीएफ खाते में शुरू में निकासी प्रतिबंधित है। खाता खोलने के 7वे वर्ष से सीमित राशि की निकासी की जा सकती है| खाते से पूरी राशि केवल खाता पूरा होने पर (15 वर्ष) ही निकाली जा सकती है। कुछ असाधारण स्थितियों में जैसे गंभीर बीमारी पर खाते को परिपक्वता से पहले बंद करने की अनुमति दी जाती है और पूरा पैसा निकाला जा सकता है।

पीपीएफ अकाउंट बैलेंस से ऋण तीसरे वर्ष से छठे वर्ष में लिया जा सकता है । अधिकतम लोन की राशि 2 वर्ष के पूर्ववर्ती शेष जमा राशि का 25% होगी। लोन को 36 महीनों के भीतर चुकाना होता है और लोन पर ब्याज की दर पीपीएफ की ब्याज दर से अधिक होती है।

बैंक या डाकघरों में पीपीएफ खाता (PPF in Banks or Post Office)

पीपीएफ खाता बैंकों या डाकघरों में खोला जा सकता है और उनके बीच स्थानांतरित भी किया जा सकता है। पीपीएफ खाते के नियम सभी जगह एक से होते हैं और ब्याज की दरें भी समान होती है।

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