अदरक के लाभ एवं उपयोग

अदरक – एक आयुर्वेदिक औषधि

भोजन को स्वादिष्ट व पाचन युक्त बनाने के लिए आमतौर पर अदरक का उपयोग किया जाता है। इसका अधिकांश उत्पादन केरल राज्य में होता है। यह भूमि के अंदर उगती है। अदरक को सुखा कर सौंठ बनाई जाती है। गीली मिट्टी में दबाकर रखने से यह काफी समय तक ताजा बनी रहती है। अदरक हृदय रोग को दूर करती है साथ ही शुगर तथा डायबिटीज को भी नियंत्रित करती है। नियमित रूप से अदरक में नींबू और सैंधा नमक मिलाकर खाने से कैंसर से बचा जा सकता है। अदरक कफ का नाश करती है और इसका अधिक सेवन रक्त की पुष्टि करता है। यह एक उत्तम पाचक है। आम से उत्पन्न होने वाले अजीर्ण, अफरा, शूल, मितली और उलटी आदि में तथा सर्दी-खाँसी में अदरक बहुत उपयोगी होती है।

विभिन्न भाषाओं में अदरक के नाम:
संस्कृत – आद्रक, आर्द्रशाक
हिंदी – अदरक, सौंठ
मराठी – आलें
गुजराती – आदु
बंगाली – आदा, सूंठ
तेलगू – सल्लम, शोंठि
अदरक के गुण:

आयुर्वेद ने अदरक को महान औषधि माना है। क्योंकि अदरक में अनेक औषधीय गुण होते हैं। इसकी प्रकृति गर्म, तीक्ष्ण और भारी होती है। यह भूख बढ़ाने वाली, पाचक, रुचिकारक, त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) से मुक्त करती है। अदरक की रासायनिक संरचना देखें तो इसमें 80% जल, 53% स्टार्च, 12.4% प्रोटीन, 7.2% फाइबर (रेशे), 1.8% इसेन्शियल ऑयल (तात्विक तेल) और औथियोरेजिन होता है। जबकि सौंठ में केवल 10% ही जल रहता है। इसके अलावा सौंठ में प्रोटीन, नाइट्रोजन, अमीनो एसिड, स्टार्च, ग्लूकोज, सूक्रोस, फ्रूक्टोस, सुगंधित तेल, लियोरेसिन, रैफीनीस, कैल्शियम, विटामिन ‘बी’ और ‘सी’ प्रोटिथीलिट एन्जाइम्स भी होते हैं। प्रोटिथीलिट एन्जाइम के कारण ही सौंठ कफ-नाशक और पाचन क्रिया में विशेष गुणकारी सिद्ध होती है।

अदरक के स्वास्थ्य लाभ / औषधीय प्रयोग:
1. यह कफ, खांसी-जुकाम, सिरदर्द, कमर दर्द, पसलियों में दर्द या छाती में होने वाली पीड़ा को दूर करती है। साथ ही पसीना लाकर शरीर के रोम छिद्रों को खोलती है।
2. चोट लगने पर अदरक को पीसकर, गर्म करके दर्द वाले स्थान पर लगभग आधा इंच (मोटाई) लेप करके पट्टी बाँधने कर सरसों का तेल लगाकर सेक करने से राहत मिलती है।
3. गठिया (आर्थराइटिस), साइटिका और गर्दन व रीढ़ की हड्डियों की बीमारी (सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस) में अदरक से उपचार किया जाता है।
4. अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े मुंह में रखकर चूसने से हिचकियां आनी बंद हो जाती हैं।
5. भूख मर जाने पर, पेट में मरोड़ उठने पर, पेचिश होने पर, दमा होने पर, शरीर में दर्द के साथ बुखार आने पर, कब्ज होने पर, कान में दर्द होने पर, उल्टियाँ होने पर, मोच आने पर, उदर-रोग में और मासिक धर्म में अनियमितता हो जाने पर अदरक (सौंठ) को दवाई के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
6. पेट दर्द में एक ग्राम पिसी हुई सौंठ, थोड़ी सी हींग और सेंधा नमक की फांकी गरम पानी के साथ लेने से फ़ायदा होता है।
7. अदरक का रस गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है।
8. जीवन शक्ति और दीर्घायु को बढ़ावा देने के लिए भी अदरक का उपयोग किया जाता है।
9. अदरक का रस में त्रिकुटा व सैंधा नमक मिलाकर लेने से गले में घिरा हुआ कफ निकल जाता है।
10. विभिन्न प्रकार के रूमेटिक रोगों में जहाँ कर्टिकोस्टेराईड तथा नान-स्टेराइड दर्द नाशक दवाएं भी दी जाती हैं। वहाँ अदरक का रस बहुत ही लाभदायक होता है।
11. अदरक कुष्ठरोग, पीलिया, रक्त, पित्त, ज्वर, दाह रोग आदि में उपयोगी औषधि है।
12. अदरक और प्याज का रस समान मात्रा में पीने से उल्टी (वमन) होना बंद हो जाता है।
13. अदरक के टुकड़े को दांतों के बीच में दबाकर रखने से दांतों का दर्द समाप्त हो जाता है।
14. भोजन से पूर्व अदरक की कतरन में नमक डालकर खाने से खुलकर भूख लगती है, खाने में रुचि पैदा होती है, कफ व वायु के रोग नहीं होते हैं।
15. अदरक का पाउडर उबले हुए पानी में शहद के साथ लेने से गठिया में लाभ मिलता है।
16. भोजन के उपरान्त अदरक व नींबू के रस में सैंधा नमक मिलाकर पीने से अपच दूर हो जाती है और भूख लगती है।
17. सर्दियों में अदरक को गुड़ में मिलाकर खाने से सर्दी कम लगती है तथा सर्दी से होने वाली खांसी में आराम मिलता है।
18. एक गिलास गरम पानी में एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर कुल्ले करने से मुंह से दुर्गंध आनी बंद हो जाती है।
19. अदरक का रस शरीर के विषैले तत्व और पेट के कीड़ों को खत्म करने में लिए अचूक दवा साबित होती है।
20. अदरक का रस रूसी को भी नियंत्रित करता है, यह बालों के लिए भी उपयोगी है।
21. जीवन शक्ति और दीर्घायु को बढ़ावा देने के लिए भी अदरक का उपयोग किया जाता है।
22. आधा कप उबलते हुए गरम पानी में एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर एक-एक घंटे के अंतराल में पानी पीने से दस्त पूरी तरह बंद हो जाते हैं।
23. अदरक एक दर्द निवारक के रूप में भी काम करता है। इस का प्रयोग दर्दनाक माहवारी, माइग्रेन, अपच और संक्रमण के लिए भी किया जाता है। अदरक खाने से मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया भी मर जाते हैं।
24. शरीर में वसा का स्तर कम करने में भी अदरक काफ़ी मददगार है।
25. सर्दी के कारण सिरदर्द हो तो सौंठ को घी या पानी में घिसकर सिर पर लेप करने से आराम मिलता है।
26. अदरक का चूर्ण बनाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। काढ़ा बनाने के लिए सूखे अदरक का 15 ग्राम चूर्ण एक प्याला पानी में मिलाकर उबालें। जब पानी एक-चौथाई रह जाए तो इसे छानकर रोगी को पिला दें।
27. अदरक का शर्बत:- पक्के अच्छे अदरक का रस का रस 1 किग्रा, शक्कर 2 किग्रा। शक्कर की चासनी बना लें, उसी में अदरक का रस मिलायें और मन्द अग्नि पर पकाएं। जब चासनी 1 तार की हो जाये तब उसे छानकर ठण्डी होने पर बोतल में भर लेंवे। मात्रा- 10-20 ग्राम। यह उदरवात, आमप्रकोप, दुर्गन्ध, उदरशूल और पतले दस्त को दूर करता है।
28. आर्द्रकावलेह:- अदरक की चटनी 200 ग्राम, घी 200 ग्राम और गुड़ या शक्कर 1 किग्रा। पहले अदरक को मन्द अग्नि पर घी में भूनें, लाल हो जाने पर गुड़ या शक्कर की चासनी मिलाकर अवलेह बना लें। मात्रा- 10 ग्राम। उपयोग:- अग्निकाप, उदरवात, आमवृद्धि, अरुचि और कफ वृद्धि को दूर करता है। यह प्रसूता के लिए भी हित कारक है। प्रसूता के लिए गुड़ में अवलेह बनाना चाहिये।

वैद्य जगदीश प्रसाद दुबे,
B.A.M.S. राष्ट्रीय आयुर्वेदिक संस्थान
सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेद अधिकारी

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